उस दिन रूद्र और शुष्मि के बीच बस इतनी ही बात हो पाई। हाँ दोनों एक दूसरे से बहुत बात करना चाहते थे, बावजूद इसके उन्होंने बात नहीं की। रूद्र दूर से shushmi को डांस करते हुए और सेल्फी लेते हुए देखता रहा। कुछ ऐसा ही शुष्मि भी कर रही थी। वो सेल्फी लेना हो या डांस करना, shushmi ने कई बार उसे तिरछी नजरों से देखा था। और ये बात रूद्र को पता थी। जो उसे बहुत रोमांचित कर रही थी। लेकिन, चाह कर भी वो शुष्मि के पास नहीं जा सकता था। काम खत्म होने के बाद वो शुष्मि को गेट तक छोड़ने भी आया था और भरे मन से उसे जाते हुए भी देखा था। इसके बाद रूद्र फिर अपने काम में लग गया।
रूद्र बहुत थका हुआ था तो अगले दिन वो देर से सो कर था। शाम के 6 बजे वो नहाया और 7 बजे अपने काम से निकल गया। रात 10 बजे वो घर लौटा। उसके लेते हुए बस 5 मिनट ही हुए थे कि एक मैसेज आया ' क्या हम बात कर सकते हैं '। रूद्र ने भी रिप्लाई किया कि 10:30 के बाद। फिर एक मैसेज आया ' जब फ्री होना बता देना '। वैसे रूद्र का मन तो कर रहा था कि अभी फ़ोन कर दे। लेकिन, उसका शरीर टूट रहा था। खैर उसने ठीक 10:30 पर उस नंबर पर कॉल कर दी।
उधर से पहली आवाज आई - कैसे हो ?
रूद्र - मस्त, आप कैसे हो।
शुष्मि - क्या कर रहे थे ?
रूद्र - आपकी आवाज सुनने का इंतजार।
शुष्मि - कुत्ते हो तुम, मुझे तुमसे बात ही नहीं करनी।
रूद्र - क्या हुआ गुस्से में क्यों हो ?
शुष्मि - तुमने कल मुझसे बात तक नहीं की, इतना एटीट्यूड।
रूद्र - बात तो हुई थी, हम दोनों
रूद्र बस इतना ही बोल पाया कि शुष्मि ने बीच में ही उसे टोक दिया।
शुष्मि - इसे तुम बात करना कहते हो। कल मेरे साथ तुम डांस कर सकते थे। मेरे साथ एक फोटो खींच सकते थे। हम दोनों की कम से कम एक फोटो तो हो ही सकती थी। वो सब गधों ने फोटो खिंचवाई, तुमने देखा भी नहीं मेरी तरफ। लेकिन, तुम लड़के हो ना, क्यों आओगे तुम।
ये सब सुनकर रूद्र सिर्फ हंस रहा था। क्योंकि वो नहीं जानता था कि शुष्मि उसके बारे में क्या सोचती है।
रूद्र - तुम्हारा मन था तो तुम मुझे बोल देती। हर बात के लिए डांटती हो, उस वक़्त भी डांट देती और घसीट ले जाती अपने साथ। यार मैं काम में लगा हुआ था, वो जरुरी था ना।
शुष्मि - अपनी गलती मानोगे नहीं। अच्छा सच बताओ तुम्हारा मन नहीं था मेरे साथ डांस करने का।
रूद्र - मेरा तो बहुत मन था, लेकिन तुम्हारे पास वो जो गधे खड़े थे ना वो मुझे बिलकुल भी नहीं पसंद और वो काम भी बहुत जरुरी था। तो मैंने मन को मारना ही जरुरी समझा।
शुष्मि - अच्छा एक बात बताओ कोई गर्लफ्रैंड है।
रूद्र - नहीं
शुष्मि - अबे इतना समय बीत चुका है, बूढ़े होते जा रहे हो और गर्लफ्रैंड नहीं कोई।
रूद्र - हां, नहीं है। तुम्हारे अलावा कभी कोई दिल में नहीं उतरा।
shushmi - कुछ साल पहले मैं रिलेशनशिप में थी।
roodra - मुझे तुमसे मतलब है, तुम्हारे पास्ट से नहीं। हाँ ये अलग बात है कि मैं तुमसे पास्ट टेंस से प्यार करता हूं।
शुष्मि - ऐसी बातें कहां से सीखते हो।
रूद्र - तुम्हें देखकर।
दोनों अपनी पुरानी यादों को ताजा करते रहे और एक दूसरे को चिढ़ाते रहे। इस तरह से रात करीब तीन बजे तक दोनों की बात होती रही। फिर सो गए। अगले दिन इत्तफाक से दोनों टकरा गए ( असलियत में पहले से उन्होंने मिलने का प्लान बना लिया था )। वहां रूद्र ने शुष्मि की फोटो खिंचवाने की इच्छा को अलग ही तरह से पूरी की। शुष्मि भी कह रही थी कि ये अच्छा तरीका है कि सबके सामने सेल्फी भी ले ली और किसी को शक भी नहीं हुआ। उस रात भी दोनों ने काफी बात की। अगले दिन से ये बातें वीडियो कॉल पर होने लगीं। यहां तक कि दोनों कई बार साथ में घूमने भी गए और काफी देर से लौटे थे। मंदिर जाना, साथ में लंच करना और रात-रात भर बात करना, ये सिलसिला उनका कई दिनों तक चलता रहा। दोनों तीन बार लॉन्ग ड्राइव पर भी गए।
वैसे दोनों ही अलग-अलग कास्ट के हैं और ये बात दोनों अच्छी तरह से जानते थे। बावजूद इसके दोनों ही कुछ दिनों के लिए तो इस बात को भूल जाना चाहते थे। या ये कहें कि भूल ही गए थे। एक महीने बाद दोनों ने इस मुद्दे पर बात की। आखिर वो दिन भी आ गया जिससे हर प्यार करने वाला डरता है।
शुष्मि - मुझे जैसा पति चाहिए तुम बिलकुल वैसे ही हो। लेकिन, मेरे पापा नहीं मानेंगे। वो कास्ट को ज्यादा मानते हैं, कि लड़का अपनी कास्ट का होना चाहिए।
रूद्र ने बीच में ही रोकते हुए पूछा - मैं दुनिया को नहीं मानता, मुझे सिर्फ तुमसे मतलब है। जो तुम कहोगी मैं वही करूंगा। तुम्हारे लिए मैं पूरी दुनिया से टकरा सकता हूं। लेकिन, तुम्हारे सामने मेरी आवाज नहीं निकलती। तुम क्या चाहती हो ? फिर दोनों काफी देर तक शांत रहे और सन्नाटे को सुनते रहे। फिर रूद्र ने ये ख़ामोशी तोड़ी। " एक काम करो हम आज के बाद इस बारे में बात नहीं करेंगे और किसी को कुछ कहने की जरुरत नहीं है। जब सही समय आएगा तब हम बात करेंगे। हम दोनों बात अब नहीं करेंगे।
जिस दिन दोनों की बात हुई थी। उस दिन अंत में रूद्र ने जिंदगी में पहली और आखिरी बार एक शायरी बोली थी। उसने शुष्मि से कहा,
" मुझे घर में चारों तरफ दिखाई दे वो
मुझे कमरे की दीवारें उसके जैसी चाहिए !
अपने पिता की खातिर मना किया तुमने मुझे
हे भगवान, मुझे बेटी इसके जैसी चाहिए। "
रूद्र और शुष्मि के बीच कॉल ही नहीं बल्कि आखिरी बात थी जब दोनों एक दूसरे को समझ रहे थे। इसके बाद से दोनों के बीच सिर्फ मैसेज और स्टेटस के जरिये ही बात होती है। वो भी कभी-कभी।
#P.S.💗💗

Bahot achhe yrr
ReplyDeleteThank you very much...
Deleteबेहतरीन भाई
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद।। 🙏
DeleteBht khoob👌👌
ReplyDelete🙏🙏
DeleteEk no
ReplyDelete🙏🙏
DeleteBahut badhiya Pakas Bhaiya 👌👌👌👌👍👏😊😘
ReplyDeleteDhanyawaad hero.
DeleteAwesome 👏👏
ReplyDeleteजो खराब है उसे खराब रहने दो
ReplyDeleteउसे एक धुंधली तस्वीर
मुझे बन्द किताब रहने दो
मेरा हर एक लफ्ज़
महज़ एक हर्फ़ रहने दो
हां फ़र्क़ है उसमें और मुझमे
और ये फ़र्क़ रहने दो !
🌻
क्या बात कही है अपने।। दिल लूट लिया।।
DeleteKya baat hai ...Dil jeeta lia chhote 💗 keep it up
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