भाग - 1
MULTIDIMENSION अर्थात बहुआयाम। मतलब इस ब्रह्माण्ड में एक से ज्यादा आयाम मौजूद हैं और सभी एक दूसरे से बस थोड़े से ही अलग हैं। सनातन धर्म तो हमेशा से ही इस बारे में कहता आया है और अब हॉलीवुड की एवेंजर्स मूवी में भी इस बारे में बात की गई है। इन सभी में हम मौजूद तो हैं, लेकिन सभी में थोड़ा-थोड़ा फर्क जरूर है। कुछ ऐसा ही हमारे रूद्र के साथ भी है, आज आपको एक और रूद्र के बारे में बताने जा रहा हूँ। जो मौजूद तो हर एक आयाम में है, लेकिन उसकी बुरी किस्मत हर जगह पीछे पड़ी हुई है। चलिए अब अपने बारे में रूद्र खुद ही आप को बताएगा कि आखिर इस आयाम में उसके साथ हुआ क्या है!
आगे की कहानी रूद्र की जुबानी..........
मेरा नाम रूद्र है। आज मैं 65 साल का हो गया हूँ। मतलब मेरा पैसठवां जन्मदिन है। मेरे बच्चे और नाती-पोते सभी तैयारी तो कर रहे हैं। लेकिन अब वो इतनी खुशी से नहीं मनाते हैं। बस मेरी फोटो पर माला चढ़ा दी है और सामने बस शान्त बैठे हुए हैं। क्योंकि अब मैं उनके साथ नहीं हूं। जी हाँ आज से 30 साल पहले एक कार दुर्घटना में मेरी मौत हो चुकी है। लेकिन आज भी वह दिन मेरी यादों में ताजा है।
जब मैं पैदा हुआ था तो घर के सभी लोग बहुत खुश थे कि अब छोटू का जन्मदिन पूरा देश मनाएगा। घर में सब मुझे छोटू कहते थे। भाई, पापा, दीदी, मम्मी सभी बहुत प्यार करते थे। फिर स्कूल और उसके बाद काॅलेज गया। मैंने शहर के ही एक प्रतिष्ठित डिग्री काॅलेज से पढ़ाई करके बैचलर डिग्री प्राप्त कर ली थी। मैं बहुत खुश था क्योंकि कुछ ही दिनों में मेरे भाई की शादी होने वाली थी। भाई की शादी बहुत धूमधाम से हुई, मैं सारी रात भईया और भाभी के साथ जश्न मनाता रहा। शादी के एक हफ्ते बाद ही 15 अगस्त था, मेरा 25वाँ जन्मदिन। सुबह उठते ही सभी ने मुझे बधाईयाँ और आशीर्वाद दिए। मैं जब नहा कर नाश्ता करने बैठा तब भाई ने मुझे एक छोटा सा डिब्बा दिया। मैंने सोचा कि भाई ने मुझे मेरी पसंदीदा घड़ी गिफ्ट की है। लेकिन जब मैंने वो डिब्बा खोला तो उसमें मेरी उम्मीदों से बढ़कर था.....चाभियों का जोड़ा। मैंने सोचा कि भाई मेरे लिए मेरी पसंदीदा बाईक लाए हैं। लेकिन जब मैं दौड़कर बाहर गया तो मेरी हवाईयाँ उड़ गईं। क्योंकि मेरे सामने मेरे पसंदीदा रंग की मारुति स्विफ्ट कार खड़ी थी। तभी भाई ने पीछे से आकर कान में धीरे से कहा, ‘ये तेरे ही लिए है छोटू’। मैं तो खुशी से उछल ही पड़ा। शाम हुई मैंने केक काटा फिर भाई और कुछ दोस्तों के साथ पार्टी करने के लिए निकल गया।
पार्टी करके हम घर वापस आ ही रहे थे कि 2-3 कि.मी. पहले एक बेकाबू ट्रक ने हमारी कार में पीछे से टक्कर मार दी। हमारी कार हवा में काफी ऊपर उछली और फिर औंधे मुँह जमीन पर गिर गई। जिससे मेरा सिर कार की छत से तेजी से टकराया। मेरे सिर से खून निकलने लगा और मैं बेहोश हो गया। थोड़ी देर बाद मुझे होश आया लेकिन मुझे सिर्फ जमीन पर खून फैला दिखा और कुछ लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। मैं फिर बेहोश हो गया। अब मेरी आँख खुली तो खुद को हाॅस्पिटल में पाया। मेरे सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा था। लेकिन, सामने मम्मी, पापा को देखकर काफी आराम मिला। डाॅक्टर ने मुझे नींद की दवा का इंजेक्शन लगाकर सुला दिया। मैं शायद 24 घंटे से ज्यादा नींद में रहा। तीन दिन बाद मुझे बताया गया कि उस हादसे में कार के शीशे का एक बड़ा टुकड़ा भाई के सिर में घुस गया था। जिससे वहीं भाई की मौत हो गई थी। मैं बहुत रोया लेकिन डाॅक्टर ने फिर मुझे नींद का इंजेक्शन लगा दिया और मैं सो गया। 10 दिन बाद मैं डिस्चार्ज होकर घर लौट आया। मैं ठीक से चल नहीं पा रहा था। क्योंकि मेरे पैर की हड्डी टूट गई और डाॅक्टर ने पैर में राॅड डाल दी थी। इस दौरान भाभी ने इसे अपनी नियति मानते हुए मेरी बहुत देखभाल की।
भाई की मौत का जिम्मेदार मैं ही था। न मैं कहता, न ही हम बाहर पार्टी करने जाते और न ये हादसा होता। एक दिन मैं रोते-रोते खुद को कोस रहा था कि मेरी वजह से ही मेरी भाभी विधवा हो गईं। शायद भाभी ने मुझे देख लिया था, वो मेरे पास आईं और डांट कर शांत करा दिया। मैं शांत तो हो गया, लेकिन भाई की याद बहुत आ रही थी। थोड़ी देर बाद मेरी दवाई का समय हो गया। मम्मी ने दवा दी और मैं सो गया। कुछ ही दिनों में मैं पूरी तरह ठीक हो गया। बिना किसी सहारे के चलने फिरने भी लगा। कुछ दिनों बाद मैंने भईया की बाईक निकाली और उसे साफ करने लगा। सच बताऊँ तो काफी दिन से घर में पड़ा-पड़ा मैं बोर हो गया था तो सोचा आज दोस्तों से ही मिल आऊँ। दोपहर के तीन बज रहे थे और शायद मैं हर्ष के घर से लौट रहा था। जब मैं शहर के एक प्रतिष्ठित माॅल के सामने से गुजर रहा था कि अचानक से एक कार बैक हुई और मुझसे टकरा गई। मैं जमीन पर गिर गया, बस थोड़ी सी खरोंच आई। मैं और कुछ राहगीर उस कार वाले को डाँटने के लिए बढ़े लेकिन उस कार में तो कोई था ही नहीं।
क्रमशः ............
