अंतिम भाग
वैसे इतने समय में शुष्मि कैसी है यह तो नहीं पता, लेकिन रूद्र बहुत ही बदल गया है। पहले सिर्फ लोअर और टीशर्ट में रहने वाला लड़का अब जींस पहनने लगा है। यहां तक कि फॉर्मल कपड़े पहन कर ही काम के लोगों से मिलता था। वैसे शुष्मि से अलग होने के बाद से रूद्र ने खुद को सिर्फ काम में ही झोंक दिया। उम्र के साथ ही रूद्र ज्यादा परिपक्व भी होता जा रहा था। इस बात का अंदाजा तो उसके परिवार ने लगा ही लिया था और अब वो उसकी शादी की भी बात सोचने लगे। लेकिन, रूद्र लगातार इंकार कर देता है।
सालों से लगातार अपने काम में मशगूल रूद्र रोज की तरह ही आज भी अपनी पसंदीदा लाल रंग की बाइक से ऑफिस के लिए निकला, हालांकि चौराहे की लाल लाइट की वजह से उसे रुकना पड़ा। अब इसे इत्तेफाक कहें या भगवान की प्लानिंग, बाइक के ठीक बगल में आकर एक कार रुकी। जिसकी बाईं खिड़की से चूड़ियों वाले हाथ निकले हुए थे। साथ ही उस हाथ के नाखुनों में नीली साड़ी से मैच करते हुए नेवी ब्लू व पिंक की मिक्स नेलपॉलिश लगी हुई थी। जिसे देखते ही रूद्र को किसी की याद आ गई। इस याद के चक्कर में उसे पता भी नहीं चला कि कब ट्रैफिक लाइट हरी हो गई। हालांकि पीछे से आ रहे हॉर्न की आवाजों ने उसे अहसास करवा दिया कि भाईसाहब जाग जाओ।
ख्यालों से बाहर आते ही रूद्र ने तेजी से अपनी बाइक दौड़ा दी और सीधे अपने दोस्त के ऑफिस के बाहर रुका। रुक कर उसके हेलमेट उतारते ही वहां कार से कुछ लोग उतर कर रूद्र के सामने हाथ जोड़ रहे थे तो कुछ हाथ मिला रहे थे। यह सब कुछ दूर से कोई देख रहा था, कार वही थी और साड़ी व नेलपॉलिश भी वही थी जो थोड़ी देर पहले लाल रंग की लाइट के पास थी। उन दोनों आँखों ने पहचान लिया था कि यह रूद्र ही है, लेकिन इतने सारे लोग उसके सामने हाथ क्यों जोड़े हुए हैं। इन्हीं सब बातों को सोचते हुए उन खूबसूरत हाथों ने अपना मोबाइल निकला और कान से लगा लिया, साथ ही यह भी बोली कि " यह हमेशा से यह अखड़ू " है।
इस बात को 48 घंटे से ज्यादा बीत चुके थे, कि करीब रात के 9 बजे जब रूद्र अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था तब उसका फोन बजा। फोन की स्क्रीन देखकर वह मुस्कुराया और फिर कट करके अपने काम में लग गया। साथ ही यह भी जान लीजिये कि उस रात काम करने के बाद रूद्र ने काफी रात तक शराब पी। हालांकि बावजूद इसके वो सुबह जल्दी उठकर अपने काम के लिए चला गया। ऑफिस पहुंच कर जब उसने अपना फोन देखा तो एक मैसेज पढ़ा, जिसमें लिखा था कि ' कुछ ज्यादा ही बिजी हो गए हो, बहुत बदल गए हो '। इसके रिप्लाई में रूद्र ने लिखा कि " वक़्त सब कुछ बदल देता है, मैं तो फिर भी इंसान हूं "। बस इस बात की वजह से ही शुष्मि को गुस्सा आ गई और फिर दोनों के बीच कई दिनों तक वार्तालाप ( मैसेज पर ) हुई।
भले ही शुष्मि और रूद्र के बीच बातें हुईं लेकिन, अब हमारे लड़के को थोड़ा अटपटा लगने लगा था। क्योंकि उसे पता था कि इसका कोई मतलब नहीं है। अब शादी के बाद वो किसी और की अमानत है, ऐसे में प्यार भले कितना भी हो, किसी की इज्जत का ख्याल पहले रखना चाहिए और इसीलिए रूद्र ने उन बातों पर फुल स्टॉप लगा दिया।
फिर भी उसके मन में एक ही बात चल रही थी,
" मेरी हर दुआ में रहने वाला शख्स
किसी को बिन मांगे मिल गया।"
इस आखिरी बात को भी 20 दिन गुजर चुके थे। आपको बता दें कि भले ही रूद्र ने बात करना बंद कर दिया था, लेकिन उसने सभी बातों को रिकॉर्ड कर लिया था और रोज लूप में सुनता था। ऐसे ही एक दिन वो अपने काम से शहर से बाहर जा रहा था, हाइवे पर था, शुष्मि की आवाज सुन रहा था और 100 की स्पीड की बाइक चलाए जा रहा था। अभी कुछ 15-20 मिनट ही गुजरे थे कि एक कार तेजी से बगल से निकली, यहां तक कि कार की वजह से रूद्र की बाइक थोड़ी लड़खड़ा सी गई। इसके बाद रूद्र के मुँह से निकला कि ' कितने चूतिया लोग हैं, ऐसों की वजह से ही एक्सीडेंट होते हैं। ' वो गुस्से में कार को बढ़ते हुए देख रहा था। अभी मुश्किल से आधा किलोमीटर ही आगे बढ़े होंगे कि दूसरी तरफ से आ रही एक ट्रक का आगे का पहिया अचानक से फट गया और डिवाइडर तोड़ते हुए इस तरफ तेजी से आई और उस कार से टकरा गई। यह घटना इतनी तेजी से घटी कि रूद्र अवाक रह गया। वो तेजी से बाइक भगा कर एक्सीडेंट वाली जगह पहुंचा।
हादसा देख कर उसकी आंखों से सिर्फ आंसू ही निकल रहे थे, क्योंकि कार की कंडक्टर वाला दरवाजा खुला था और एक शादी शुदा लड़की खून से लथपथ बाहर की ओर झुकी हुई थी। रूद्र ने उसे बाहर निकाला और गोद में लेकर बस देखे और रोए ही जा रहा था। दरअसल वो लड़की कोईऔर नहीं बल्कि शुष्मि ही थी और जब रूद्र ने उसे गोद में लिया तब उसकी ऑंखें खुलीं और शुष्मि ने उसे देखकर मुस्कुराते हुए कहा " आ गए, तो तुम मेरा पीछा नहीं छोड़ोगे " और फिर हमेशा के लिए शांत हो गई।
रूद्र के मन में तो बस यही चल रहा था था,
" कौन छुड़ाना चाहता है पीछा तुझसे और तेरी यादों से,
ये तो वो कैद है जो जान से ज्यादा अजीज है। "
