Wednesday, 30 December 2020

प्यारा सा अहसास

मेरा नाम है पाकस श्रीवास्तव और आज जो कहानी लिखने जा रहा हूँ उसके पात्रों के सिर्फ नाम काल्पनिक हैं। घटना इनके जीवन की है और मैं इन पात्रों से पूछने के बाद ही ये कहानी लिख रहा हूँ। 



  रूद्र को सालों से इस दिन का इंतज़ार था। आखिर १३ साल से भी ज्यादा समय गुजर चुका है। लेकिन, आज भी २००७ का दिसंबर का महीना रूद्र को अच्छे से याद है जब आखिरी बार उसे देखा था। वो साइकिल पर थी साथ ही ब्लू जीन्स और ब्राउन हाईनेक में बहुत ही प्यारी लग रही थी। वो शायद रूद्र पर बहुत गुस्सा थी क्योंकि रूद्र को उसने डांटा भी था और दूर जाने के लिए भी कहा था। पता नहीं क्यों उस डांट के बाद भी रूद्र का प्यार बढ़ता जा रहा था। उस वक़्त वो कहना बहुत कुछ चाहता था, लेकिन कह नहीं सका। क्योंकि उसका ध्यान shushmi के चेहरे से हट ही नहीं रहा था। वो आखिरी दिन था जब उसने शुष्मि को जी भर कर देखा था क्योंकि, रूद्र को अच्छे से पता था कि उस दिन के बाद शायद ही उसे देख पायेगा। वो अपनी हर गलती की माफ़ी मांगना चाहता था। रूद्र shushmi को खोना नहीं चाहता था, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।  

         पता नहीं ये इत्तेफ़ाक़ था या किस्मत का खेल कि आज १३ साल बाद फिर से शुष्मि और रूद्र एक दूसरे के सामने हैं और ये भी दिसंबर का ही महीना है। वैसे शायद इंतज़ार तो दोनों को ही था इस दिन का, लेकिन शुष्मि को अचानक यूँ अपने सामने देखकर रूद्र के जरूर होश उड़ गए। वो न तो कुछ बोल ही पा रहा और न ही उससे नज़रें ही हटा पा रहा था। शुष्मि शायद इस बात को भांप गई और वो खुद ही वहां से हट गई। क्योंकि उस जगह दोनों के घरवाले भी थे। वैसे दोनों वहां आए थे अपने-अपने काम से तो दोनों जल्दी ही काम में लग गए। काम में मशगूल होने के बावजूद रूद्र बार-बार शुष्मि को देखने में ही लगा हुआ था। वैसे shushmi ने भी ये नोटिस किया कि रूद्र बार-बार उसे ही देख रहा है। एक-दूसरे को नोटिस करते हुए दोनों अपने काम में लगे रहे। हाँ बात करने की पहल दोनों में से किसी ने भी नहीं की। पता नहीं दोनों के मन में क्या चल रहा था कि इतने साल बाद मिलने के बाद भी दोनों चाह कर भी एक दूसरे से HI भी नहीं बोल रहे थे। खैर उस दिन का काम खत्म होने के बाद दोनों अपने - अपने घर चले गए। कुछ भी हो दोनों के दिल में एक दूसरे से मिलने, बात न करने और छुप - छुप कर देखने का यह "अहसास बहुत ही प्यारा" था। क्योंकि दोनों ही इस बात को अच्छे से जानते थे कि दो दिन बाद फिर से दोनों को मिलना है। शायद इसीलिए दोनों ने अपने मन की बात जाहिर नहीं होने दी और रूद्र तो फूला नहीं समा रहा था कि जिसको वो प्यार करता है आज उसको इतने सालों बाद देखा वो भी इतने करीब से और बिना गुस्से में। काले और गुलाबी रंग की साड़ी में शुष्मि बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। प्यारी तो वो हमेशा से ही है। 

      दो दिन बाद दोनों मिले, आज shushmi गाउन पहने हुए थी। आज तो उसको देखने के बाद रूद्र बस यही सोच रहा था कि परियां ऐसी ही होती होंगी, क्योंकि न तो वो ही दिखती हैं और न ही ये मुझसे बात करती है। आज जब शुष्मि ने रूद्र को देखा तो कॉम्पलिमेंट भी दिया कि अच्छे लग रहे हो। अब बेचारा रूद्र क्या बोले कि, "तुम्हारी आवाज सुनने के लिए मैं सालों से तड़प रहा था।"  रूद्र का तो ऐसा हाल था कि अभी बेहोश न हो जाए। वैसे उसने भी बोला कि बहुत सुन्दर लग रही हो वो भी अपने मन में। इन सबके लगभग एक घंटे बीतने के बाद दोनों में बात हुई। 

Shushmi - तुम गधे हो। 

Roodra - हाँ। 

Shushmi - इतने साल कहाँ थे ? 

Roodra - तुम्हें ढूंढ रहा था। 

Shushmi -तो दिखाई क्यों नहीं दिए ?

Roodra - खुद को तुम्हारे लायक बना रहा था। 

Shushmi - मतलब। 

Roodra - सॉरी, क्योंकि तुमने कहा था कि मैं तुमसे कभी ना मिलूं। लेकिन, २००२ में जब तुम्हें पहली बार देखा था तब ही तुमसे प्यार हो गया था। बस कभी कह नहीं सका। शायद कभी हिम्मत नहीं हुई या यूँ कहूं कि तुमसे डरता भी बहुत था। डर ये भी था कि तुम गुस्सा हो जाओगी और मुझे थप्पड़ न मार दो। साथ ही ये भी था कि अगर मैं उस वक़्त ये कहता कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ तो हो सकता है कि मेरी ये बात तुम्हें बचकानी लगती और हम-तुम दूर हो सकते थे। स्कूल में सिर्फ तुम्हें देखने ही आता था। तुम्हारा वो मालगुड़ी डेज का गाना गुनगुनाना और गुलाबी रंग की ladybird साइकिल से स्कूल आना मैं कभी नहीं भूल सकता। याद है २००७ में अगस्त का महीना, एक दिन बारिश बहुत हो रही थी और तुम पांडेय जी की दुकान के सामने खड़ी थी, थोड़ा भीग गई थी शायद, बहुत प्यारी लग रही थी। 

      शुष्मि बस लगातार सुनती जा रही थी। तभी वो बोल पड़ी तुम इतना नोटिस करते थे मुझे। कभी कहा क्यों नहीं। मुझे कम से कम एक बार बता तो सकते थे। लेकिन, २००७ के बाद से तो ऐसे गायब हुए जैसे कोई क्राइम किया था। अरे कभी मिल तो सकते ही थे न एक बार। तब रूद्र प्यार से बोला इतने साल बीत गए, लेकिन मुझे डांटने की आदत नहीं गई तुम्हारी। ये सुनने के बाद शुष्मि शांत हुई, थोड़ा शर्मा गई थी शायद।  फिर रूद्र बोला, " मैं तुम्हे कभी खोना नहीं चाहता था, तो कभी मिलने की कोशिश नहीं की। हाँ सोशल मीडिया पर स्टॉक जरूर करता था लेकिन, कभी डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था क्योंकि मुझे तुम्हारी मुस्कुराहट बहुत पसंद है।       

                       I LOVE YOU SHUSHMI "  




                  इसके बाद क्या हुआ जल्द बताऊंगा।