मेरा नाम रूद्र है। मेरी उम्र से किसी को कोई मतलब नहीं, मुझे भी नहीं। हां पढ़ने में बहुत अच्छा हूं। ऐसा मम्मी कहती हैं। बस किसी तरह से ग्रेजुएशन कर लिया। हां कॉलेज बहुत अच्छा था। काफी कुछ सीखने को मिला। लेकिन एक दिक्कत हो गई, काफी सीखने और पढ़ने के बाद भी मुझे कोई जॉब नहीं मिली। बहुत इधर-उधर हाथ मारा, कई जगह इंटरव्यू भी दिए। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। खैर जैसे-तैसे अपना जेबखर्च निकाल ही लेता था। कई सॉफ्टवेयर भी सीखे थे, कुछ अलग भी करना आता था। मम्मी-पापा ने दिमाग भी काफी अच्छा बना दिया था। काफी ज्यादा बुरा लगने लगा। कॉलेज ख़त्म होने के लगभग ३ सालों बाद एक दोस्त की वजह से मुझे नौकरी मिल गई। काफी अच्छा काम था। बस लिखते रहना था। वैसे लिखना मुझे काफी ज्यादा पसंद था, तो मन लग गया। लेकिन अकेलापन भी लगता था। क्योंकि, कोई ऐसा नहीं था जिससे अपने दिल की कोई भी बात कह सको। जितना दोस्त से बात करता उतने में मज़ा नहीं आता था। कुछ महीनों बाद मेरे ऑफिस में एक लड़की आई। उस दिन उसने काले रंग का सलवार सूट पहन रखा था। कानों में झुमके भी पहन रखे थे, जो उसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। सच कहूं तो मुझे उससे पहली नज़र में ही प्यार हो गया था। लेकिन उससे कह नहीं सकता था। पता नहीं क्या सोचती मेरे बारे में, कि कैसा लड़का है। लड़की देखी नहीं कि आ गया लाइन मारने। बस रोज उसे छुप-छुप के देखता था। कई बार सोचा कि उससे बता दूं। लेकिन हिम्मत नहीं हुई। वैसे मैं आज तक शहर ज्यादा घूम नहीं पाया था, लेकिन घूमने की इच्छा बहुत थी।
एक दिन किसी काम से हम दोनों के बीच पहली बार बातचीत हुई। मुझे ख़ुशी तो बहुत हो रही थी लेकिन ज़ाहिर नहीं कर सकता था। आखिर ऑफिस के हिसाब से उसका सीनियर भी था ना मैं। तो मैंने उससे बस ऐसे ही चलताऊ बात करी। कि हां तुम्हारा काम हो जाएगा। इस बात को कुछ दिन हो गए थे और मेरा मन उससे बात करने का कर रहा था। तो एक मैंने उससे उसकी पसंदीदा मूवी पूछ ही ली। लेकिन मुझे ये सुन कर झटका लगा कि जो मूवी मुझे पसंद थी, वही उसे भी पसंद थी। मैंने सोचा लो मेरी तो लाटरी ही लग गई। उसके बाद से हम दोनों के बीच लगभग रोज बातें होने लगीं। पता नहीं क्यों जितना उससे बात करता फीलिंग्स उतनी ही बढ़ती जाती। लेकिन उसने कहा कि हम अच्छे दोस्त हैं। खैर मुझे तो बस उसका साथ चाहिए था मिल रहा था, तो मैं मना क्यों करता। कभी -कभी हम दोनों ऑफिस के बाद घूमने भी निकल जाते। बस उसके चेहरे पर वो प्यारी सी स्माइल देखने के लिए मैं कुछ भी कर सकता था। मन तो करता था की i love you बोल दूं। लेकिन फिर सोचा वो बुरा न मान जाए। इस तरह से पूरा एक साल बीत गया। लेकिन मैं उससे कह नहीं सका, क्योंकि मैं उसे हर्ट नहीं करना चाहता था। लेकिन अब मुझसे उससे कहे बिना नहीं रहा जा रहा था। मेरी नौकरी एक नई कंपनी में लग गई थी और तीन बाद मुझे ज्वाइन भी करना था लेकिन, अभी तक उसे बताया नहीं था। नौकरी दूसरे शहर में थी तो उसे बताना भी जरुरी था। क्योंकि मैं उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था। उस दिन मैं उसके साथ एक रेस्टोरेंट में गया। हम दोनों ने ही उसकी पसंदीदा 'चाऊमीन' खाई। और उस दिन मैंने उसे सब कुछ सच-सच बता दिया। मैंने उसे अपनी नौकरी के बारे में भी बताया और उस दिन मैंने उसे अपने दिल की सारी बात बता दी।
उस दिन उसने कुछ नहीं बोला। बस चुपचाप चली गई। लेकिन फिर भी मैंने उसको उसके घर पर छोड़ा और फिर अपने घर गया। उसके बाद उसने मुझसे बात नहीं और ना ही मेरा फ़ोन उठाया। मेरे जाने का भी दिन आ गया। मैंने सोचा कि वो आएगी लेकिन, वो मुझसे मिलने नहीं आई। मेरा मन नहीं कर रहा था की मैं जाऊं। बस इतना चाहता था कि वो अगर एक बार बोल दे तो मैं रुक जाऊंगा। लेकिन वो तो उस दिन से मिली ही नहीं थी। मैं बेमन से दूसरे शहर आ गया। उसको कई बार कॉल की लेकिन उसने नहीं उठाया। मैं रोज उसकी फोटो देख रोता हूं कि उस दिन मुझे अपने दिल की बात नहीं बतानी चाहिए थी। लेकिन अब बता दिया तो बता दिया। कम से कम उसे अंधेरे में तो नहीं रखा। इस बात को आज एक साल हो गए हैं। आज अचानक से मुझे एक कॉल आई। मैंने फ़ोन उठाया तो उधर की आवाज सुन कर मेरी आँखों में आंसू आ गए। उधर से एक आवाज आई 'कैसे हो '......वो वही थी, पूरे एक साल बाद। मन तो किया कि खूब लड़ाई करुं, खूब सुनाऊं उसे। लेकिन उसकी आवाज़ सुनकर मेरा सारा गुस्सा गायब हो गया। फ़ोन पर ही मैं लगभग आधे घंटे तक रोया। वो बस चुपचाप सुनती ही रही। उसने मुझे फिर बहुत समझाया। फिर अचानक से उसने मुझे डांट दिया कि 'चुप होते हो या फिर फ़ोन काटूं'। उस दिन उसने बताया कि वो किसी और से प्यार करती थी लेकिन, वो नहीं चाहती थी कि मैं दूसरे शहर जाऊं। क्योंकि जिस दिन मुझे निकलना था उसके दो दिन बाद ही उसकी शादी थी। वो चाह कर भी मेरा फ़ोन नहीं उठा पाई और शादी के बाद उसे नंबर भी बदलना पड़ा। आज वो माँ बनने वाली है और अपनी ज़िन्दगी में खुश है।
वो खुश है, ये सुन कर मुझे ख़ुशी हो रही थी। लेकिन और बाकी बातें मुझे दर्द दे रही थीं। लेकिन मैंने उसे ज़ाहिर नहीं होने दिया। हम दोनों ने दो घंटे तक बात की। लेकिन मैं बहुत दुखी था। संयोग देखो कि आज वैलेंटाइन्स डे है। लेकिन मुझे थोड़ी सी भी ख़ुशी नहीं हो रही थी। मैं रोना चाहता था, वो भी चिल्ला-चिल्ला कर। मैं तुरंत भाग कर अपने ऑफिस की छत पर चला गया। खुद को शांत करने की बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन, नहीं कर पा रहा था। आज मैं अपने पहले ऑफिस के पहले दिन से भी ज्यादा अकेला महसूस कर रहा हूं। बस अपना यही दर्द ले कर छत की दीवार के कोने में खड़ा हो गया। इसके बाद क्या हुआ नहीं पता। बस अब हवा के अलावा और कुछ भी नहीं महसूस हो रहा है ...... मेरे दिल से आवाज आ रही थी कि
I care about you more than you think and I LOVE YOU more than you know.
I care about you more than you think and I LOVE YOU more than you know.
One sided love is Heart breaking💔🙁
ReplyDeleteIt's true boss...lekin iska mazaa hi alag hai..iskI koi barabari nhi hoti...
ReplyDeleteLovely Story
ReplyDeletebut ye love wala angle smjh nahin aata...(tumhe rona nahin chahiye tha)...hamme kuch accha hoga to hamare hisse ka apne aap milta hai.
(and if u r writing a blog use bookish language n sentences)
Thank you bhai for valuable advice..😚
ReplyDeleteNice story
ReplyDeleteWonderful story of a great writer
ReplyDeleteThank you. .bhai
ReplyDelete👍
ReplyDeleteGood going. Write in hindi not hinglish🌝
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